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आंखों की रोशनी बचाने का बड़ा अभियान, प्रदेश का पहला ‘मिशन दृष्टि बिलासपुर’ शुरू करेगा जिला प्रशासन: DC

उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि यह हिमाचल प्रदेश का पहला जिला स्तरीय व्यापक नेत्र जांच अभियान होगा, जिसके तहत बच्चों में दृष्टि दोष की समय पर पहचान, उपचार और रोकी जा सकने वाली दृष्टिबाधिता की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

बिलासपुर : जिला प्रशासन बिलासपुर और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयास से जिले में “मिशन दृष्टि बिलासपुर” शुरू किया जाएगा। उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि यह हिमाचल प्रदेश का पहला जिला स्तरीय व्यापक नेत्र जांच अभियान होगा, जिसके तहत बच्चों में दृष्टि दोष की समय पर पहचान, उपचार और रोकी जा सकने वाली दृष्टिबाधिता की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अभियान का पहला चरण 1 सितंबर 2026 से सितंबर 2027 तक संचालित किया जाएगा। इस अवधि में जिले के सभी सरकारी व निजी विद्यालयों और 1,111 आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वास्थ्य विभाग की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीमें विकास खंडवार एवं चरणबद्ध तरीके से नेत्र जांच करेंगी। जिले के 782 विद्यालयों, जिनमें 116 वरिष्ठ माध्यमिक, 58 उच्च, 82 माध्यमिक तथा 526 प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत प्रत्येक विद्यार्थी की दृष्टि जांच सुनिश्चित की जाएगी।

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उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य 8 वर्ष से कम आयु के बच्चों में दृष्टिदोष की प्रारंभिक अवस्था में पहचान करना है। उन्होंने बताया कि इस आयु तक आंखों का विकास लगातार जारी रहता है। यदि इस दौरान निकट दृष्टि दोष, दूर दृष्टि दोष, दृष्टिवैषम्य, भेंगापन अथवा आलसी आंख जैसी समस्याओं का समय पर उपचार नहीं किया जाए तो बच्चों में स्थायी दृष्टि हानि की संभावना बढ़ जाती है। समय पर जांच और उपचार से ऐसे अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है।

उन्होंने बताया कि अभियान के संचालन के लिए जिला प्रशासन ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के माध्यम से दो ऑटो रिफ्रैक्टर मशीनें खरीदकर स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध करवाई हैं। यह कंप्यूटरीकृत मशीन कुछ ही सेकंड में आंखों का नंबर मापकर दृष्टि दोष का प्रारंभिक आकलन करती है। इन मशीनों के माध्यम से विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और दूरस्थ क्षेत्रों में भी त्वरित एवं सटीक नेत्र जांच संभव होगी।

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उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जिन बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या पाई जाएगी, उन्हें स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास भेजा जाएगा। पात्र बच्चों को आवश्यकता अनुसार चश्मे भी उपलब्ध करवाए जाएंगे, ताकि किसी भी बच्चे की पढ़ाई दृष्टि दोष के कारण प्रभावित न हो।

उपायुक्त ने बताया कि अभियान के दूसरे चरण में वरिष्ठ नागरिकों सहित जिले के सभी नागरिकों को नेत्र जांच के दायरे में लाया जाएगा। इसके अंतर्गत व्यावसायिक वाहन चालक, औद्योगिक श्रमिक, पुलिस, होमगार्ड, वन एवं राजस्व विभाग के मैदानी कर्मचारी तथा दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की भी चरणबद्ध जांच की जाएगी। अभियान के दौरान प्रत्येक लाभार्थी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे उपचार एवं अनुवर्ती कार्रवाई की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

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राहुल कुमार ने कहा कि मिशन दृष्टि बिलासपुर का उद्देश्य नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घर-द्वार तक पहुंचाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल बच्चों में दृष्टि दोष की समय पर पहचान सुनिश्चित करने के साथ-साथ बिलासपुर को हिमाचल प्रदेश का पहला सर्वव्यापी नेत्र जांच जिला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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