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स्कूल के लिए 11 KM पैदल चलीं, समाज की बंदिशें तोड़ीं… अब सम्मान के साथ सेवानिवृत्त हुईं कृष्णा राठौर

घने जंगलों से होकर रोज 11 किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ाई करने वाली और सामाजिक बंदिशों को चुनौती देकर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाली स्वास्थ्य शिक्षिका कृष्णा राठौर शुक्रवार को 38 वर्षों से अधिक के गौरवपूर्ण सेवाकाल के बाद सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हो गईं।

नाहन : घने जंगलों से होकर रोज 11 किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ाई करने वाली और सामाजिक बंदिशों को चुनौती देकर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाली स्वास्थ्य शिक्षिका कृष्णा राठौर शुक्रवार को 38 वर्षों से अधिक के गौरवपूर्ण सेवाकाल के बाद सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हो गईं। बीएमओ कार्यालय स्वास्थ्य खंड धगेड़ा में आयोजित विदाई समारोह में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके समर्पण, कार्यनिष्ठा और जनसेवा के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी।

बता दें कि कृष्णा राठौर की जीवन यात्रा किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं है। ऐसे समय में जब गुर्जर समाज में बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहन नहीं मिलता था, उन्होंने तमाम सामाजिक विरोध और कठिन परिस्थितियों के बीच शिक्षा हासिल की। गांव से स्कूल तक पहुंचने के लिए उन्हें रोजाना घने जंगलों से होकर एकतरफा करीब 11 किलोमीटर पैदल (संभालका से कोलर) चलना पड़ता था। घने जंगलों से होकर रोज 11 किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ाई करने वाली और सामाजिक बंदिशों को चुनौती देकर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाली स्वास्थ्य शिक्षिका कृष्णा राठौर शुक्रवार को 38 वर्षों से अधिक के गौरवपूर्ण सेवाकाल के बाद सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हो गईं।

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जब उन्होंने छठी कक्षा में प्रवेश लिया तो समाज की पंचायतें उनके घर पहुंच गईं और पिता पर बेटियों की पढ़ाई बंद कराने का दबाव बनाया, लेकिन उनके पिता रूपराम चौधरी ने समाज के दबाव के आगे झुकने से इनकार करते हुए साफ कहा कि बेटियां पढ़ेंगी भी और सुरक्षित भी रहेंगी। उनके इस फैसले ने न केवल कृष्णा राठौर का भविष्य बदला, बल्कि समाज में बेटियों की शिक्षा को लेकर सकारात्मक सोच की भी शुरुआत की।

5 जून 1986 को उन्होंने राजकीय नर्सिंग प्रशिक्षण विद्यालय नाहन में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण शुरू किया और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 23 जून 1988 को राजपुरा ब्लॉक के स्वास्थ्य उपकेंद्र चौकी, मृगवाल में पहली नियुक्ति बतौर महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता मिली। इसके बाद उन्होंने एमसीएच केंद्र माजरा, मातर, कांशीवाला, ईएसआई अस्पताल कालाअंब, कौलांवाला भूड़, क्यारी, देवका पुड़ला व सैनवाला सहित स्वास्थ्य खंड धगेड़ा के तहत कई स्वास्थ्य संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।

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नौकरी के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी और स्नातक की उपाधि हासिल की। वर्ष 2010 में उनका चयन कोलकाता स्थित प्रतिष्ठित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हाइजीन एंड पब्लिक हेल्थ में हुआ, जहां से उन्होंने स्वास्थ्य शिक्षा में एक वर्षीय डिप्लोमा पूरा किया। इसके बाद 7 अगस्त 2018 को उन्होंने स्वास्थ्य शिक्षिका के रूप में पदोन्नति पाकर स्वास्थ्य खंड धगेड़ा में कार्यभार संभाला और सेवानिवृत्ति तक स्वास्थ्य जागरूकता, परिवार कल्याण, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, नशा निवारण और जन-जागरूकता अभियानों के साथ साथ कोविड-19 में उल्लेखनीय योगदान दिया।घने जंगलों से होकर रोज 11 किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ाई करने वाली और सामाजिक बंदिशों को चुनौती देकर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाली स्वास्थ्य शिक्षिका कृष्णा राठौर शुक्रवार को 38 वर्षों से अधिक के गौरवपूर्ण सेवाकाल के बाद सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हो गईं।

विदाई समारोह के दौरान खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोनीषा अग्रवाल भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, आज मेरे ब्लॉक का नमक चला गया है। जैसे भोजन में नमक के बिना स्वाद अधूरा रहता है, उसी तरह कृष्णा जी के बिना हमारा कार्यालय भी अधूरा लगेगा। उन्होंने कृष्णा राठौर की कार्यनिष्ठा, अनुशासन और सकारात्मक सोच की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ और सुखद भविष्य की कामना की।

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समारोह में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कृष्णा राठौर को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल, स्वस्थ और सुखमय जीवन की शुभकामनाएं दीं।

Hitesh Sharma
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हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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