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सिरमौर में HRTC के ये रूट होंगे बंद! सरेंडर की तैयारी

सरकार ने घाटे के सभी रूटों को सरेंडर करने संबंधी अधिसूचना जारी की है। यानी अब ऐसे रूटों पर निजी आपरेटर अपनी बसें चलाएंगे...

नाहन : जिला सिरमौर में HRTC के एकमात्र नाहन डिपो के तहत आने वाले ग्रामीण क्षेत्र के कई रूटों पर आने वाले दिनों में सरकारी बसें दौड़ती नहीं दिखेंगी। इनमें कई रूट ऐसे हैं जिन पर कई दशकों से बसों की सेवाएं आज तक जारी हैं। निगम ने 54 साल पुराने नाहन-टौंडा रूट को पहले ही बंद कर दिया है।

इसके साथ साथ नाहन-विक्रम बाग रूट पर भी सेवा बंद हो चुकी हैं। निगम ने अभी दो रूटों पर सरकारी बसों की सेवाएं बंद की हैं। अब दो दर्जन के करीब अन्य रूटों पर भी इन बसों की सेवाएं बंद करने की तैयारी चल रही है। यानी ऐसे सभी रूटों को सरेंडर किया जा रहा है।

निगम प्रबंधन की मानें तो इन रूटों पर बसें चलाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। यानी कमाई से ज्यादा निगम को रूट पर बस चलाने का खर्च वहन करना पड़ रहा है। इसे लेकर सरकार ने घाटे के सभी रूटों को सरेंडर करने संबंधी अधिसूचना जारी की है। यानी अब ऐसे रूटों पर निजी आपरेटर अपनी बसें चलाएंगे।

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अब सवाल ये भी उठता है कि ये बस रूट अचानक घाटे में कैसे आ गए। कई रूट तो ऐसे भी हैं जहां पर निगम की एक-एक बस सेवा ही उपलब्ध है। अकसर ये भी देखा गया है कि एकमात्र बस सेवा के होने से यात्रियों को पूरे सफर में सीट भी नहीं मिल पातीं। अभी तक जिन दो रूटों को बंद किया गया है, वहां लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सरेंडर किए जाने वाले ये सभी रूट ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े हैं। आज भी हर किसी के पास अपनी गाड़ियां नहीं हैं। आधी आबादी अभी भी सरकारी बसों पर ही निर्भर है। लोग सरकारी बसों में इस विश्वास के साथ यात्रा करते हैं, ताकि उनका सफर सुरक्षित हो। लोगों का HRTC पर यही विश्वास आज भी कायम है, लेकिन अब शायद ही लोगों को अपने रूटों पर सरकारी बसों के दर्शन हों।

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इन सुविधाओं से भी रहना पड़ेगा महरूम
इन रूटों पर सरकारी बस सेवाएं बंद होने से सरकार की ओर से दी जा रही ग्रीन कार्ड, सम्मान कार्ड और स्मार्ट कार्ड जैसी सुविधाओं से भी महरूम रहना पड़ेगा। इसके साथ साथ स्कूली बच्चों, दिव्यांगों, पूर्व सैनिकों के साथ साथ महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल पाएगा।

एक लाख की आबादी होगी प्रभावित
जिला सिरमौर की आबादी 7 लाख से ऊपर है। यदि ये रूट बंद होते हैं तो इससे एक लाख की आबादी प्रभावित होगी। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग कामकाज के सिलसिले में रोजाना बाजारों का रुख करते हैं। वहीं बीमार लोग अस्पतालों तक पहुंचते हैं। रूट बंद होने से ग्रामीण लोगों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। सबसे ज्यादा निम्न और मध्यवर्गीय लोगों पर इसका असर पड़ेगा।

ये रूट होंगे सरेंडर
मात्तर भेड़ो-नाहन, ददाहू-संगड़ाह-कशलोग वाया मोहतू-लगनू, सराहां-सोलन वाया नारग, नाहन-चन्हालग, पांवटा साहिब-नाहन, पांवटा साहिब-किल्लौड़, नाहन-अप्पर सुरला-कठाना, नाहन-श्री रेणुका जी वाया शिलणु कैलाश, श्री रेणुका जी-नाहन, नाहन-नेहर सबार, नाहन-गाड्डा, शिलाई मुद्रिका बुटियाना-शिलाई कॉलेज-कुंहट-सुईनल, ददाहू-पांवटा साहिब, ददाहू-खाली अच्छोण, नाहन मुद्रिका बस स्टैंड-मेडिकल कॉलेज-दिल्ली गेट-बनोग, नाहन-गाड्डा, ददाहू-बेचड़ का बाग, ददाहू-महीपुर, ददाहू-दीद बगड़, द्राबिल-ददाहू, सराहां-सोलन वाया देवल टिक्करी-डिलमन, सराहां-मंडी खड़ाना, सराहां-डगलगाघाट, सराहां-मानगढ़-मानरिया, सराहां-नड़ाब खोजर, नाहन-गुमटी वाया कालाअम्ब, गुमटी-नाहन वाया सैनवाला जैसे रूट शामिल हैं।

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क्या कहते हैं अधिकारी
उधर, नाहन डिपो का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे HRTC सोलन डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक सुरेंद्र राजपूत ने बताया कि ये सही है कि घाटे के रूटों को सरेंडर किया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। सिरमौर के कितने रूट सरेंडर होंगे ये वीरवार को नाहन पहुंचकर रिकार्ड देखकर ही बताया जा सकता है।

Hitesh Sharma
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हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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